मौलिक होने का सर्वप्रथम अर्थ तो यह है-अपने मूल की ओंर बढ़ने का सृजनात्मक प्रयास .द्वितीय रूप में मौलिक होने का अर्थ मानवीय अनुभूतियों-प्रेरणाओं-संवेदनाओं का पुनर्सृजन है.और सबसे महत्वपूर्ण रूप में मौलिक होने का अर्थ मनुष्यता-समाज-परिवेश-प्रकृति के लिए नयी संभावनाओं के द्वार खोलना है.