प्रतिभा जन्मजात होकर भी सामजिक गति से अछूती नहीं है .प्रतिभाशाली अपने युग -परिवेश -ज्ञान -ऊर्जा का निचोड़ एवं संभावना होता है .प्रतिभाशाली समस्त युग की सृजनात्मकता का संयोजक एवं आविष्कारक होता है .अतः कोई भी समाज हो वह बिना प्रतिभाशाली के गतिशील नहीं होता है .
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